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आगम के आलोक में आचार्य भिक्षु

Vol. 61 · No. 02February - 2013pp. 21-22Hindi

Summary

18वीं सदी के संत आचार्य भिक्षु एक महान तत्ववेत्ता थे, जिन्होंने बिना विश्वविद्यालयी शिक्षा के गहन तत्वज्ञान अर्जित किया। मुनि जीवन स्वीकारने के बाद आगमों के अध्ययन में लगे, उन्होंने पाया कि उनके आचार-विचार और आगमों के तत्व निरूपण में एकरूपता नहीं है। स्थानकवासी संप्रदाय के आचार्य रघुनाथ जी से जिज्ञासाओं का समाधान न मिलने पर वे उस परंपरा से अलग हो गए और स्वतंत्र साधना करने लगे, जो तेरापंथ के नाम से प्रख्यात हुई। आचार्य भिक्षु ने आगम के आलोक में अनेक प्रस्थापनाएं कीं, जिनमें शुद्ध साधन से ही शुद्ध साध्य की प्राप्ति, धर्म और अधर्म का अमिश्रण, हर स्थिति में हिंसा को हिंसा मानना, पुण्यबंध का धार्मिक क्रिया से जुड़ा होना, धर्म का आधार संप्रदाय नहीं बल्कि जीवन की पवित्रता, और संयममय जीवन को सम्यक् एवं सार्थक मानना शामिल है। तत्कालीन धर्मगुरु इन प्रस्थापनाओं से

Conclusion

आचार्य भिक्षु की प्रस्थापनाओं का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि उन्होंने धार्मिक आचरण में शिथिलता के विरुद्ध एक कठोर और स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया। उनके द्वारा स्थापित तेरापंथ संप्रदाय ने साधना में शुद्ध साधनों पर बल देकर यह सिद्ध किया कि आगमों के मूल तत्त्वों से समझौता किए बिना भी एक अनुशासित और आचारनिष्ठ संघ का निर्माण संभव है। उनके विचारों का प्रभाव केवल उनके समकालीनों तक स

Article order

In this issue

Vol. 61 · No. 02
7-8संघ धूप भी है, छांव भी है9-12संगठन का कल्पवृक्ष13-15संघनिष्ठा का विकास16-18वर्द्धमान बनने की तैयारी19-20तेरापंथ का प्राण केन्द्र -मर्यादा महोत्सव21-22आगम के आलोक में आचार्य भिक्षुCurrent article23-24तेरापंथ की आधारशिलाः अनुशासन का धर्मचक्र25-26विकास के आधार स्तंभ-मर्यादा और अनुशासनडॉ. साध्वीं कुन्दन रेखा27-29आस्था हो तो भिक्षु जैसी30-33सर्वे संतु निरामया34-35मर्यादा का सुरक्षा कवचप्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी36-37जीवन का मौलिक आधार मर्यादाडॉ. हीरालाल छाजेड (जैन)38-40संगठन का मौलिक आधार- मर्यादा41-43आचार्य भिक्षु एवं काण्ट का निरपेक्ष आदेश : एक अध्ययनडॉ. समणी चैत्यप्रज्ञा44-46श्रावक अपने आप से पूछे47जीवन और काल की सार्थकता48-49समय को पहचानो50-53अनेकान्त प्रिय आचार्य श्री भिक्षु54-56आत्मीयता की झील : अनुग्रह के फूल57-58तेरापंथ शासन का कार्यकारी हस्ताक्षर महासभानिनोदकुमार चोरडिया

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