રોમૅન્ટિસીજમ અને વ્યંગ્ય
By Ramesh S. Betai
Summary
રોમૅન્ટિસીજમ અને વ્યંગ્ય લેખ़ युरोपीय साहित्य न रोमांचक प्रवाह románticism अंगे विस्तृत चर्चा करे छे औने तेनी सामाजिक-नैतिक असर Gujarati साहित्य पर केवि रिते प्रगट थाय छे ते देखाड़ी आपे छे। लेख़क कॉलरिज, वर्डस्वर्थ, शेली, कीट्स जेवा अंग्रेजी कवियों न उद्धरणों साथे romantic विचारधारा नी मूल बातों जेवी के भावुकता, कल्पना, स्वतंत्रता औने कुदरत साथे न सहअस्तित्व बखूबी समझावे छે। ते दर्शावे छे के romanticism नो प्रभाव classical नियम-बंधारणो पर विरोधीक रूपे पड़यो औने कला नी मात्र बाह्य रचना करता अंतर्मना शालाओं पर भार मुक्त कराव्यो। लेख़ मा 'સ્વપ્ન-प्रक्रिया', સ્વપ્ન-दशા, लोक कल्पना, अंग्रेजी काव्य मा रहेली आत्म-प्रकाश पद्धति औने ફૅન્ટેસી यथार्थ ने सरल रजुआत छे। તેથી Gujarati साहित्य मा romanticism न स्वीकार औने पूरा-अનુપાય न विश्लेषण करे छे। तेओ 'व्यંગ्य' — व्याज मा रहेली तीखाश — साथे romantic भावना न संगम केवी रिते थयो छे ए दर्शावे छे। ઉદાહરણ स्वरूप काही নাটको, वार्ताओ औने કाव्यो मा प्रेम औने प्रकृति विषये भावुक भाषा होए छे पण साथे साथे सामाजिक कुप्रवृतियो, अन्याय औने अंध विधियो ऊपर व्यંગ्य शरणे हुंફे ताकात नु कार्य करे छे। लेख़ कलाप्रेमी माटे विचार दायक अभ्यास छे जे मा लेखक कहे छे के व्यંગ्य विना romantic विचार शून्य रही शके छे. આથી दोस्तो माटे आ दिशा मा घणा उदाहरणो भी आपेला छे तथा आधुनिक दृष्टि ए भी romanticism ने समझी Gujarati साहित्य समृद्ध बनावी शकाय छे।
Conclusion
નિષ્કર્ષ રૂપે लेख़क જણાવે છે કે romanticism मात्र ઐતિહાસિક प्रवाह नथी; ए आज पर्यंत सर्जनात्मक प्रेरणा औने आत्मવિचार माटे शक्तिशाली सूत्र बनी रहल छे। सामाजिक विकास माटे व्यंग्य नो सहुनापैयो होवा छता, स्वप्न दृष्टि औने दिलासा आपवा माटे romantic લાગણियो पन जरूरी छे। बन्ने नु सुमेल साहित्य ने ऊँचा शिखरो पर लै जाय छे।