વૈકો કિત – વૈદન્યમભજ્જી ભાગિતિ
By Aruna K. Patel
Summary
अनुषा કે. Patel द्वारा लिखित लेख़ प्राचीन विद्वानों द्वारा उच्चारित वाक्यांश "વૈકો કિત – वैदन्यभज्गी भागिति" न अनुवाद औने व्याख्या प्रस्तुत करे छे. लेख़ मा शब्द औने अर्थ न संबंध विशे भारतीय व्याकरण-दर्शनिक परंपरा न विचारो ने ओळखाव्या छे. लेखक प्राचीन ग्रंथो मा आवता "વक" औने "વच" शब्दो न विविध अर्थ, तफावत औने क्रिया न प्राधान्य ने समझावे छे. ते दर्शावे छे के उपनिषद, ब्राह्मण, महाभारत औने अन्य स्मृति ग्रंथो मा वाणी, વक औने प्राण न संबंध केवी रिते समझाव्यो छे. लेख़ मा प्राण औने वक न संबंध पर श्लोक, छंद औने दृष्टांत छे. लेख़क बतावे छे के शब्द शक्ति, वाच, शक्ति औने प्राण नी एकता विना सृष्टि अस्तित्व मा नथी औने अपनी बोलियों मा रहेली वृद्धि औने संस्थानो पन आ ऋग्वेदिक सिद्धांतोंने प्रतिबिंब करे छे. लेख़ मा संस्कृत श्लोकों नु अनुवाद, टिपणीयों औने संदर्भ सूत्रो आप्या छे जेने ती मूल संदेश समझी शकाय छे. अंत मा लेख़क दर्शावे छे के प्राचीन दर्शनिको माटे शब्द मा दिव्य शक्ति जोवा मले छे औने आ विचार ने आजे पन आधुनिक जीवन मा महत्ता आपी शकाय.
Conclusion
આ लेख નિષ्कर्ष आपे छे के વાણી मात्र ध्वनि नथी; ते प्राण औने ज्ञान न मिलाप छे. प्राचीन ग्रंथों मा जे संकेत श्लोकों छे ते आजे पन मानवने तेना शारीरिक औने आध्यात्मिक अस्तित्व विषे विचार करवां प्रेरणा आपे छे. संस्कृत शब्द शक्ति द्वारा आत्म विचार करवा तरे भाषा नी शक्ति न मूल सर्जनात्मक स्वरूप समझाय छે।