कविवर नयसुन्दर एक अज्ञात रचना-नेमिनाथ वसंत विलास
By Agar Chand Nahata
Summary
यह लेख मध्यकालीन कवि नयसुन्दर की एक अज्ञात रचना ‘नेमिनाथ वसंत विलास’ की खोज और अध्ययन का वर्णन करता है। नयसुन्दर जैन तीर्थंकरों के जीवन पर आधारित काव्यों के लिए प्रसिद्ध हैं, परन्तु यह रचना अब तक अप्रकाशित थी। पाण्डुलिपि के अध्ययन से पता चलता है कि कविता में बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ की कथा और वसंत ऋतु के उत्सव का संयोजन है। लेखक कथा का सार प्रस्तुत करते हैं: नेमिनाथ अपनी शादी के दिन पशुओं के वध को देखकर वैराग्य ग्रहण करते हैं और अंततः ज्ञान प्राप्त करते हैं। कविता में लोकगीतों की झलक, श्रृंगारिक वर्णन और नैतिक संदेशों का सुंदर मिश्रण है। लेख में छन्द, भाषा (प्राचीन गुजराती/राजस्थानी) और अलंकारों का विश्लेषण किया गया है तथा अन्य ‘वसंत विलास’ काव्यों से तुलना करते हुए इसकी विशेषताओं को रेखांकित किया गया है। पाण्डुलिपि की palaeography के आधार पर रचना का काल निर्धारण भी प्रस्तावित किया गया है। यह खोज जैन narrative साहित्य के corpus में वृद्धि करती है और स्थानीय काव्य परम्पराओं की समृद्धि को दर्शाती है।
Conclusion
अज्ञात साहित्यिक कृतियों की खोज से यह स्पष्ट होता है कि जैन कवियों की रचनात्मकता विविध और समृद्ध थी। ‘नेमिनाथ वसंत विलास’ जैसी रचनाएँ न केवल धार्मिक कथाओं को लोकउत्सवों से जोड़ती हैं बल्कि सामाजिक‑नैतिक संदेश भी देती हैं। ऐसे ग्रन्थों का प्रकाशन और अध्ययन भारतीय साहित्येतिहास को व्यापक बनाता है।