Browse articles

ब्रह्माकुमारी दर्शन में “ईश्वर” की अवधारणा

By Sureshwar Meher

Vol. 402017pp. 137-147Hindi

Summary

सुरेश मेहेर द्वारा लिखित यह लेख ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक आन्दोलन में “ईश्वर” की अवधारणा का विश्लेषण करता है। ब्रह्माकुमारी मत के अनुसार परम सत्ता “ईश्वर” एक अजर‑अमर, निराकार ज्योति‑बिन्दु है जो “शिव बाबा” के नाम से जाना जाता है। लेखक सर्वप्रथम ईश्वर की पारम्परिक संकल्पनाओं—वेदान्त, भक्ति, शैव, वैष्णव, सूफी आदि—का संक्षिप्त उल्लेख करते हैं और फिर ब्रह्माकुमारी दृष्टि से उसकी तुलना करते हैं। यह दृष्टि बताती है कि ईश्वर सर्वाधिक शुद्ध, ज्ञानस्वरूप, शांत, प्रेममय, सुखदायी और शक्तिशाली आत्मा है जो सृष्टि‑चक्र के आरम्भ और अंत दोनों में कल्याणकारी भूमिका निभाती है। लेख में समझाया गया है कि ब्रह्माकुमारी ध्यान‑पद्धति (राजयोग) के माध्यम से साधक ईश्वर से सीधा संपर्क कर सकता है, जिससे आत्मा की शुद्धि और कर्मों का क्षय होता है। लेखक आलोचकों की उन आपत्तियों का भी उत्तर देता है जिसमें ब्रह्माकुमारी मत को पूर्णतः आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से उपयोगी बताया गया है। आधुनिक विज्ञान और आध्यात्मिकता के अंतरसंबंध के विषय में विचार करते हुए लेख यह दलील देता है कि ईश्वर को निराकार ऊर्जा‑स्त्रोत के रूप में समझना द्वैत‑अद्वैत विवादों से आगे बढ़ने का मार्ग प्रदान करता है।

Conclusion

लेख का सार यह है कि ब्रह्माकुमारी दर्शन ईश्वर की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत करता है जो उसे निराकार ज्योति‑स्वरूप और परम पिता के रूप में देखती है। सुरेश मेहेर के अनुसार, यह दृष्टिकोण पारम्परिक मूर्तिपूजा से हटकर आत्मिक अनुभव और राजयोग ध्यान पर बल देता है, जिससे व्यक्ति स्वयं को एवं समाज को शुद्धता, शांति और स्नेह से भर सकता है।

Article order

In this issue

Vol. 40
1-13Influence of Kashmir on the Ritual Literature of OrissaG. C. Tripathi14-23Conceptual basis of Yoga therapy in Yogopanisats and TaittiriyopanisatSushim Dubey24-40Plant-Human Linkage as Depicted in Sanskrit LiteratureDhananjay Vasudeo Dwivedi41-45GaddalikapravahahSatyavrat Verma46-56कुमारसम्भव में शिव-विषयक मिथक एवं अमूर्त शिवतत्त्वVasantkumar M. Bhatt57-65कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्रसूत्रि विरचित योगशास्त्र में ध्यानJitendra B. Shah66-94जैन संस्कृत व्याकरण परम्पराBalram Shukla95-107जैन परम्परा में धर्मध्यानDharmachand Jain108-113कच्चायनपाणिनिव्याकरणयोः कारककरणाय तुलनात्मक अध्ययनShweta Jain114-131संस्कृत स्वरों का मुक्तविकल्पन तथा प्राकृत भाषाएँSuhasani132-136प्राकृत कथा साहित्य की परम्परा एवं प्रकारHemvati Nandan Sharma137-147ब्रह्माकुमारी दर्शन में “ईश्वर” की अवधारणाSureshwar MeherCurrent article148-151हमारी जीवन शैली कैसी हो?Lata Surendra Bothra152-157पहाड़ी शैली में राधा‑कृष्ण अंकनRitika Garg158-160ग्रंथ समालोचना : Scientific Perspectives of Jainism – जैन धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोणUnexhibited

Original PDF

Inline viewer

Checking source PDF

The viewer will load here if the archive file is reachable.