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ग्रंथ समालोचना : Scientific Perspectives of Jainism – जैन धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोण

By Unexhibited

Vol. 402017pp. 158-160Hindi, English

Summary

यह ग्रंथ‑समीक्षा “Scientific Perspectives of Jainism” नामक पुस्तक का परिचय और मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। पुस्तक में सम्पादक सामणी चैतन्य प्रज्ञा, नरेंद्र भंडारी और नारायणलाल कछारा ने जैन धर्म को विज्ञान की दृष्टि से समझने का प्रयास किया है। समीक्षा में बताया गया है कि ग्रंथ तीन भागों में विभाजित है; पहले भाग में जैन तत्त्वमीमांसा के मूल सिद्धांत—आत्मा, कर्म, कर्मफल, अहिंसा, अपरिग्रह—को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया गया है। दूसरे भाग में ब्रह्माण्ड, समय, पदार्थ और जीव विज्ञान के संदर्भ में जैन सिद्धांतों की तुलना आधुनिक भौतिकी, रसायन, जीव‑विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान से की गई है। अंतिम भाग में जैन दर्शन की व्यावहारिक उपयोगिता जैसे आहार‑विज्ञान, योग, ध्यान, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अध्याय हैं। पुस्तक में 33 परिच्छेद और 657 पृष्ठ हैं, तथा प्रत्येक अध्याय को विशेषज्ञ विद्वानों ने लिखा है। समीक्षा लेखक पुस्तकीय भाषा की सुलभता, चित्रों और तालिकाओं की उपयोगिता और संदर्भ ग्रंथों की उपलब्धता की सराहना करता है। कुछ अध्याय अंग्रेजी में और कुछ हिंदी में हैं, जिससे यह शोधार्थियों और साधारण पाठकों दोनों के लिए उपयोगी है। समीक्षक यह भी इंगित करता है कि कुछ विषयों में और अधिक गहराई हो सकती थी, परंतु कुल मिलाकर यह पुस्तक जैन सिद्धांतों को वैज्ञानिक समुदाय के सामने प्रस्तुत करने में सफल है।

Conclusion

समीक्षा के अनुसार “Scientific Perspectives of Jainism” एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है जो जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान की भाषा में समझाने का सेतु बनाता है। इसमें अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मशुद्धि जैसे विचारों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ा गया है, जिससे जैन दर्शन की प्रासंगिकता समकालीन समाज में और भी स्पष्ट होती है।

Article order

In this issue

Vol. 40
1-13Influence of Kashmir on the Ritual Literature of OrissaG. C. Tripathi14-23Conceptual basis of Yoga therapy in Yogopanisats and TaittiriyopanisatSushim Dubey24-40Plant-Human Linkage as Depicted in Sanskrit LiteratureDhananjay Vasudeo Dwivedi41-45GaddalikapravahahSatyavrat Verma46-56कुमारसम्भव में शिव-विषयक मिथक एवं अमूर्त शिवतत्त्वVasantkumar M. Bhatt57-65कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्रसूत्रि विरचित योगशास्त्र में ध्यानJitendra B. Shah66-94जैन संस्कृत व्याकरण परम्पराBalram Shukla95-107जैन परम्परा में धर्मध्यानDharmachand Jain108-113कच्चायनपाणिनिव्याकरणयोः कारककरणाय तुलनात्मक अध्ययनShweta Jain114-131संस्कृत स्वरों का मुक्तविकल्पन तथा प्राकृत भाषाएँSuhasani132-136प्राकृत कथा साहित्य की परम्परा एवं प्रकारHemvati Nandan Sharma137-147ब्रह्माकुमारी दर्शन में “ईश्वर” की अवधारणाSureshwar Meher148-151हमारी जीवन शैली कैसी हो?Lata Surendra Bothra152-157पहाड़ी शैली में राधा‑कृष्ण अंकनRitika Garg158-160ग्रंथ समालोचना : Scientific Perspectives of Jainism – जैन धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोणUnexhibitedCurrent article

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