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पहाड़ी शैली में राधा‑कृष्ण अंकन

By Ritika Garg

Vol. 402017pp. 152-157Hindi

Summary

रोहिता गर्ग का यह आलेख भारतीय चित्रकला की पहाड़ी शैली में राधा‑कृष्ण विषयक अंकनों की कलात्मक विशेषताओं का अध्ययन करता है। पहाड़ी चित्रकला, विशेष रूप से बसोली, गढ़वाल और कांगड़ा शैलियाँ, 17वीं‑18वीं शताब्दी में विकसित हुईं और इसमें कृष्ण लीला, भागवत कथा, रामायण आदि विषयों पर अनेक लघुचित्र बनाए गए। लेख में बताया गया है कि कांगड़ा शैली में राधा‑कृष्ण के प्रेम, रासलीला और ब्रज‑भक्ति को कोमल रंगों, सूक्ष्म रेखाओं, प्राकृतिक पृष्ठभूमि और नायिका‑भावों के माध्यम से दर्शाया जाता है। बसोली शैली में तीव्र रंग, गाढ़े आसमान, उभरे हुए आभूषण और गहन भावाभिव्यक्ति चित्रों की विशेषता है जबकि गढ़वाल शैली में लोक‑जीवन और पहाड़ी वातावरण की झलक मिलती है। लेखक ने इन चित्रों में प्रयुक्त प्रतीकों—कमल, मुरली, यमुना, वृन्दावन—की व्याख्या की और बताया कि कैसे कलाकारों ने भक्तिरस को दृश्य माध्यम में उतारा। लेख में विभिन्न संग्रहालयों में सुरक्षित पहाड़ी चित्रों के उदाहरण, उनके रचनाकार, संरचना, रंग योजना तथा ऐतिहासिक संदर्भ भी दिए गए हैं।

Conclusion

इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पहाड़ी चित्रकला में राधा‑कृष्ण अंकन न केवल सौंदर्य की दृष्टि से उत्कृष्ट है बल्कि भक्तिभाव की गहराई को भी व्यक्त करता है। रोहिता गर्ग के अनुसार, इन लघुचित्रों ने भक्ति‑आधारित साहित्य को दृश्य रूप देकर भारतीय कला में एक अमूल्य धरोहर जोड़ी है और आधुनिक कलाकारों के लिए भी प्रेरणा‑स्रोत बने हुए हैं।

Article order

In this issue

Vol. 40
1-13Influence of Kashmir on the Ritual Literature of OrissaG. C. Tripathi14-23Conceptual basis of Yoga therapy in Yogopanisats and TaittiriyopanisatSushim Dubey24-40Plant-Human Linkage as Depicted in Sanskrit LiteratureDhananjay Vasudeo Dwivedi41-45GaddalikapravahahSatyavrat Verma46-56कुमारसम्भव में शिव-विषयक मिथक एवं अमूर्त शिवतत्त्वVasantkumar M. Bhatt57-65कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्रसूत्रि विरचित योगशास्त्र में ध्यानJitendra B. Shah66-94जैन संस्कृत व्याकरण परम्पराBalram Shukla95-107जैन परम्परा में धर्मध्यानDharmachand Jain108-113कच्चायनपाणिनिव्याकरणयोः कारककरणाय तुलनात्मक अध्ययनShweta Jain114-131संस्कृत स्वरों का मुक्तविकल्पन तथा प्राकृत भाषाएँSuhasani132-136प्राकृत कथा साहित्य की परम्परा एवं प्रकारHemvati Nandan Sharma137-147ब्रह्माकुमारी दर्शन में “ईश्वर” की अवधारणाSureshwar Meher148-151हमारी जीवन शैली कैसी हो?Lata Surendra Bothra152-157पहाड़ी शैली में राधा‑कृष्ण अंकनRitika GargCurrent article158-160ग्रंथ समालोचना : Scientific Perspectives of Jainism – जैन धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोणUnexhibited

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