काश्मीर शिवागमों में प्रमाण चिन्तन : पुस्तक की समीक्षा – समालोचना
By Suryaprakash Vyas
Summary
काश्मीर શિવાદ્ચવાર में प्रमाण चिन्तन : पुस्तक की समीक्षा समालोचना : सूर्यप्रकाश व्यास ( लेखक-प्रो.नवजीवन रस्तोगी, प्रकाशक-लालभाई दलपतभाई भारतीय संस्कृति विद्यामन्दिर, अहमदाबाद, प्रथम संस्करण, ૨૦૨૨) काश्मीर शैव दर्शन के मौलिक ग्रन्थों के लेखन और सिद्धांतो के युक्तियुक्त स्थापन में जो योगदान आचार्य उत्पल और उनके प्रशिष्य आचार्य अभिनवगुप्त का है वही स्थान वर्तमान के इस शाख्र के ' अध्ययन-अनुसंधान को आगे बढ़ाने और प्रामाणिक ग्रन्थों के लेखन में डॉ. कान्तिचन्द्र पाण्डेय और उनके प्रखर शिष्य प्रो. नवजीवन रस्तोगी का है । अर्थात् यदि डो.पाण्डेय इस शास्त्र में अनुसन्धान-लेखन के उत्पलाचार्य हैं तो प्रो. रस्तोगी अभिनवगुप्त । પ્રો. रस्तोगी ने अपने अध्ययन-अनुसन्धान का एकमेव लक्ष्य इस शाख्र को निर्धारित कर अनेक गम्भीर और प्रामाणिक ग्रन्थ- W@ से इसके अनुसन्धानात्मक साहित्य की श्रीवृद्धि की है और उसी कड़ी में अभिनव कृति “काश्मीर शिवाद्वयवाद में प्रमाण-चिन्तन ' एक अद्वितीय अध्याय है । लेखक ने कतिपय योग्य समीक्षकों का स्मरण किया है जिनकी टिप्पणियाँ ग्रन्थ के प्रकाशन के पूर्व सुलभ न દો सकीं । किन्तु विश्वास है, ग्रन्थ-प्रकाशन के बाद अब अवश्य प्राप्त हुई होगी । फिर भी न जाने વ્યો क्रिस क्रम में मेरे जैसे काश्मीर शैव दर्शन के साधारण अनुरागी को इस पर कुछ कहने का आदेश दे दिया गया । इसे न मैं प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करने के योग्य स्वयं को मानता हूं और न ही इसकी अवज्ञा का दुस्साहस कर सकता દે । अत: ग्रन्थ का आधोपान्त स्वाध्याय करने और कुछ दिन ऊहापोह में रहने के बाद (इसीलिए विलम्ब भी हुआ) कुछ रटिप्पणिया उद्भूत हुई जो संक्षेप મેં प्रस्तुत हैं :- ૬. यह ग्रन्थ सामान्य पाठकों के लिए न होकर दर्शन રાત્ર और विशेषरूप से प्रमाण-विद्या के गम्भीर विशेषज्ञों के लिए है । ર. लेखक ने विशेष प्रकार की उदात्तं भाषा-शैली જો अपने प्रस्तुतीकरण का माध्यम बनाया है जो ग्रन्थ को शास्त्रीय स्तर प्रदान करती है । રૂ. ग्रन्थ की પ્રસ્તાવના यह कथन समुचित વ સર્વથા समर्थन योग्य है कि અત્ય दर्शनों की भांति 218 समालोचना : सूर्यप्रकाश व्यास SAMBODHI काश्मीर शैव दर्शन જા प्रमाण या ज्ञानविषयक न તો स्वतन्त्र ग्रन्थ मिलता દે और न एकत्र सामग्री ।.... विषयानुरोध से प्रमाण-सम्बन्धी सन्दर्भ यत्र-तत्र बिखरे हुए हैं । लेखक ने વિવિધ ग्रन्थों में प्रकीर्ण इस सामग्री (उपजीव्य साहित्य) से जो सिद्धान्त- माला संग्रथित की है वह अभूतपूर्व व चमत्कृत करने वाली है | साथ ही काश्मीर शैव दर्शन की तत्त्वमीमांसा को पुष्ट और समुद्ध करने वाली भी है । . लेखक के अनेक तुलनात्मक निष्कर्ष में यह निष्कर्ष सर्वाधिक सरल, सूत्रूप और
Conclusion
‘ 120, Royapetth High Road, Ahmedabad - 380 001. Mylapore, Chennai-600 004. Phone : 25356692 . " Phone : (044) 24982315 2. Delhi 5. Mumbai Motilal Banarasi Dass - - Motilal Banarasi Dass 41/U-S, Banglow Road, . 8, Mahalaxmi Chamber, Jawahar Nagar, : ; . Warden Road, Delhi-110 007, ટ Mumbai-400 026. : Phone: (011) 23858335 23854826 Phone : (022) 24923526 ૩. Varanasi 6. Hindi Granth Karyalay Motilal Banarasi Dass “ Hira Baug, C. P. Tank, - “Chowk, Varanasi-221 001 Mumbai-400004. Phone : 352331 ર g Phone : (022) 23516583 Phone : (0542) 2412131 3095108 : 23513526 SAMBODHI ISSN 2249-6661